पूटा ने फिर कहा, पीयू को मिले सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा

चंडीगढ़, 23 फरवरी (ट्रिन्यू)
पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पूटा) ने आमसभा की बैठक में आज एक बार फिर पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने की मांग की है। इंगलिश आडिटोरियम में आयोजित आमसभा में पूटा सचिव प्रो. जेके गोस्वामी ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देते हुए पूटा द्वारा की गयी पहल और उपलब्धियों को गिनाया।
सर्वसम्मति से बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि पीयू के आर्थिक संकट का सदा के लिये समाधान करने के लिये सेंट्रल बनाये जाने के अलावा कोई ओर विकल्प नहीं है। इसके अलावा पूटा ने टी-1 फ्लैट तुरंत अलाट करने की मांग की जो पोजेशन के लिये एकदम तैयार हैं और जिनके लिये कौंसलिंग 22 फरवरी को हो चुकी है। बैठक में मांग की गयी कि जिन कमेटियों में पूटा प्रधान या उसका नॉमिनी सदस्य होता है उसकी मिनट्स को फाइनल अप्रूवल से पहले उनसे  साइन कराया जाये। वीसी नॉमिनी और सब्जेक्ट एक्सपर्ट के लिये इंस्पेक्शन और सिलेक्शन कमेटी में पिक एन चूज की पालिसी की बजाय रोस्टर सिस्टम लागू हो। आग की भेंट चढ़ी सर्विस बुक को फिर से तैयार कराया जाये और एलटीसी सहित सभी प्रकार के एरियर जारी किये जायें ताकि 31 मार्च से पहले उन्हें सभी तरह के भुगतान किये जा सकें। कैंपस और रीजनल सेंटरों के टीचर्स के कैस (करिअर एडवांस्मेंट स्कीम) के आवेदन प्री-स्क्रीनिंग और स्क्रीनिंग की डेट तय हो और उसका पूरी तरह से पालन हो। इसके लिये आनलाइन आवेदन शुरू किये जायें। बैठक में पीयू के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा टीचर्स के प्रनितिधियों के साथ मिसबिहेव का कड़ा नोटिस लिया गया। पूटा ने गोपनीयता और परीक्षा व मूल्यांकन व्यवस्था को बिना किसी देरी के फिर से दुरुस्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया। आफिस स्टाफ को बिना सलाह के न बदला जाये। इसी के साथ पूटा ने चेतावनी भी दी है कि अगर पीयू प्रशासन इन प्रस्तावों को लागू नहीं करता तो वे आंदोलन छेड़ने को विवश होंगे।
कर्मचारियों के लिये लागू की जाये पेंशन योजना
पूटा ने मांग की है कि पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला की तर्ज पर कर्मचारियों के लिये पीयू में भी पेंशन योजना लागू की जाये। यूनिवर्सिटी टीचर्स को देय पीएचडी इनक्रीमेंट का मामला, सेंटरों के कोआर्डीनेटर, वार्डनों की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर हो। सीनेट-सिंडिकेट और बोर्ड आफ फाइनांस की बैठकों की प्रोसीडिंग को वेबकास्ट किया जाये। टीचर्स के बीच असहमति की आवाज को दबाने के लिये सिंडिकेट की 18 दिसंबर की बैठक के फैसले की निंदा की गयी।

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